मी विजयकुमार किसन भुजबळ Knowledge is Power या ब्लॉगवर सहर्ष स्वागत करत आहे WELCOME TO MY EDUCATIONAL BLOG KNOWLEDGE IS POWER THANKS FOR VISIT MY BLOG AND FOLLOW MY BLOG
इयत्ता पाचवी नवोदय परीक्षा स्कॉलरशिप परीक्षा स्पर्धा परीक्षा उपयुक्त वेब साईट * FOLLOW MY BLOG

महत्वाच्या लिंक IMP

स्कॉलरशिप/स्पर्धा परीक्षा/जनरल नॉलेज

blog html


knowledge is power ब्लॉग वरती शालेय माहिती , परिपत्रके , मासिके , विविध पुस्तके , प्रेरणादायी व्हीडीओ , शासन निर्णय , विविध योजना ,online पेमेंट सामान्य ज्ञान टेस्ट , वृत्तपत्रे, प्रेरणादायी लेख ,स्पर्धा परीक्षा टेस्ट ,स्कॉलरशिप परीक्षा टेस्ट यांची माहिती मिळणार आहे .


 

माझ्या ब्लॉगला भेट दिल्याबद्दल मी तुमचा खूप आभारी आहे धन्यवाद

राजकुमारी अमृत कौर

 

                  राजकुमारी अमृत कौर 

 

पूरा नाम   : राजकुमारी अमृत कौर

जन्म :    2 फ़रवरी, 1889

(लखनऊ, उत्तर प्रदेश)

मृत्यु   : 2 अक्टूबर, 1964

अभिभावक : राजा हरनाम सिंह और रानी हरनाम

पति/पत्नी  : अविवाहित

नागरिकता  : भारतीय

प्रसिद्धि : स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता

जेल यात्रा  : वर्ष 1930 में 'दांडी मार्च' के समय राजकुमारी अमृतकौर ने गाँधीजी के साथ यात्रा की और जेल की सजा भी काटी।

विशेष योगदान :   1927 में 'अखिल भारतीय महिला सम्मेलन' की स्थापना की। नई दिल्ली में 'अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान' की स्थापना में भी इनका प्रमुख योगदान था।

अन्य जानकारी आप भारत की प्रथम महिला थीं, जो केंद्रीय मंत्री बनी थीं। 1950 में इन्हें 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' का अध्यक्ष बनाया गया था। यह सम्मान हासिल करने वाली वह पहली एशियायी महिला थीं।

राजकुमारी अमृत कौर  भारत की एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। वह देश की स्वतंत्रता के बाद भारतीय मंत्रिमण्डल में दस साल तक स्वास्थ्य मंत्री रहीं। देश की पहली महिला कैबिनेट मंत्री होने का सम्मान उन्हें प्राप्त है। राजकुमारी अमृत कौर कपूरथला के शाही परिवार से ताल्लुक रखती थीं। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के प्रभाव में आने के बाद ही उन्होंने भौतिक जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया और तपस्वी का जीवन अपना लिया। वे सन 1957 से 1964 में अपने निधन तक राज्य सभा की सदस्य भी रही थीं।

 जन्म तथा परिवार

राजकुमारी अमृत कौर का जन्म 2 फ़रवरी, 1889 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता राजा हरनाम सिंह कपूरथला, पंजाब के राजा थे और माता रानी हरनाम सिंह थीं। राजा हरनाम सिंह की आठ संतानें थीं, जिनमें राजकुमारी अमृत कौर अपने सात भाईयों में अकेली बहिन थीं। अमृत कौर के पिता ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। सरकार ने उन्हें अवध की रियासतों का मैनेजर बनाकर अवध भेजा था।

 

 शिक्षा

राजकुमारी अमृत कौर की आरम्भ से लेकर आगे तक की शिक्षा इंग्लैण्ड में हुई थी। उनके पिता के गोपाल कृष्ण गोखले से बहुत ही अच्छे मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध थे। इस परिचय का प्रभाव राजकुमारी अमृत कौर पर भी पड़ा था। वे देश के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेने लगी थीं।                     

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

शीघ्र ही अमृत कौर का सम्पर्क राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी से हुआ। यह सम्पर्क अंत तक बना रहा। उन्होंने 16 वर्षों तक गाँधीजी के सचिव का भी काम किया। गाँधीजी के नेतृत्व में सन 1930 में जब 'दांडी मार्च' की शुरआत हुई, तब राजकुमारी अमृतकौर ने उनके साथ यात्रा की और जेल की सजा भी काटी। वर्ष 1934 से वह गाँधीजी के आश्रम में ही रहने लगीं। उन्हें 'भारत छोड़ो आन्दोलन' के दौरान भी जेल हुई।

 

अमृत कौर 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' की प्रतिनिधि के तौर पर सन 1937 में पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बन्नू गई। ब्रिटिश सरकार को यह बात नागवार गुजरी और उसने राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद कर दिया। उन्होंने सभी को मताधिकार दिए जाने की भी वकालत की और भारतीय मताधिकार और संवैधानिक सुधार के लिए गठित 'लोथियन समिति' तथा ब्रिटिश पार्लियामेंट की संवैधानिक सुधारों के लिए बनी संयुक्त चयन समिति के सामने भी अपना पक्ष रखा।

 

 

 पहली महिला कैबिनेट मंत्री

राजकुमारी अमृत कौर पहली भारतीय महिला थीं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री बनने का मौका मिला था। पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गठित पहले मंत्रिमंडल में वे शामिल थीं। उन्होंने स्वास्थ्‍य मंत्रालय का कार्यभार 1957 तक सँभाला। 'अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान' की स्थापना में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी।

 

 राजनीतिक सफर

अपने राजनीतिक कैरियर के दौरान राजकुमारी अमृता कौर ने कई बड़े पदों को सुशोभित किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियाँ उल्लेखनीय रहीं। 1950 में उन्हें 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' का अध्यक्ष बनाया गया। यह सम्मान हासिल करने वाली वह पहली महिला और एशियायी थीं। डब्ल्यूएचओ के पहले पच्चीस वर्षों में सिर्फ दो महिलाएँ इस पद पर नियुक्त की गई थीं। नई दिल्ली में 'अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान' की स्थापना में भी उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। वह इसकी पहली अध्यक्ष भी बनायी गयीं। इस संस्थान की स्थापना के लिए उन्होंने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम जर्मनी, स्वीडन और अमरीका से मदद हासिल की थी। उन्होंने और उनके एक भाई ने शिमला में अपनी पैतृक सम्पत्ति और मकान को संस्थान के कर्मचारियों और नर्सों के लिए "होलिडे होम" के रूप में दान कर दिया था।

 

 कल्याणकारी कार्य

राजकुमारी अमृत कौर ने महिलाओं और हरिजनों के उद्धार के लिए भी कई कल्याणकारी कार्य किए। वह बाल विवाह और पर्दा प्रथा के सख्त ख़िलाफ़ थीं और इन्हें लड़कियों की शिक्षा में बडी बाधा मानती थीं। उनका कहना था कि शिक्षा को नि:शुल्क और अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। राजकुमारी अमृत कौर ने महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखकर ही 1927 में 'अखिल भारतीय महिला सम्मेलन' की स्थापना की। वह 1930 में इसकी सचिव और 1933 में अध्यक्ष बनीं। उन्होंने 'ऑल इंडिया वूमेन्स एजुकेशन फंड एसोसिएशन' के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और नई दिल्ली के 'लेडी इर्विन कॉलेज' की कार्यकारी समिति की सदस्य रहीं। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 'शिक्षा सलाहकार बोर्ड' का सदस्य भी बनाया, जिससे उन्होंने 'भारत छोडो आंदोलन' के दौरान इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 1945 में लंदन और 1946 में पेरिस के यूनेस्को सम्मेलन में भारतीय सदस्य के रूप में भेजा गया था। वह 'अखिल भारतीय बुनकर संघ' के न्यासी बोर्ड की सदस्य भी रहीं।

 

निधन

2 अक्टूबर, 1964 को राजकुमारी अमृत कौर का निधन हुआ। अमृत कौर बाल विवाह और महिलाओं की अशिक्षा को दूर करने पर निरंतर ज़ोर देती रही थीं। उन्होंने विवाह नहीं किया था। अपनी सोच और संकल्प से उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जो बुनियाद रखी, उन्हीं पर आज़ाद भारत के सपनों की ताबीर हुई थी।

         

पद्मभूषण 2024

 

पद्मभूषण 2024

 

सुश्री एम फातिमा बीवी (मरणोपरांत)   सार्वजनिक मामले

श्री होर्मुसजी एन कामा साहित्य एवं शिक्षा-पत्रकारिता

श्री मिथुन चक्रवर्ती कला

श्री सीताराम जिंदल व्यापार एवं उद्योग

श्री यंग लियू व्यापार एवं उद्योग

श्री अश्विन बालचंद मेहता चिकित्सा

श्री सत्यब्रत मुखर्जी (मरणोपरांत) सार्वजनिक मामले

श्री राम नाईक सार्वजनिक मामले

श्री तेजस मधुसूदन पटेल चिकित्सा

श्री ओलानचेरी राजगोपाल सार्वजनिक मामले

श्री दत्तात्रेय अंबादास मयालू उर्फ राजदत्त कला

श्री तोगदान रिनपोछे (मरणोपरांत) अन्य - अध्यात्मवाद

श्री प्यारेलाल शर्मा  कला

श्री चंद्रेश्वर प्रसाद ठाकुर चिकित्सा

सुश्री उषा उत्थुप कला

श्री विजयकांत (मरणोपरांत) कला

श्री कुन्दन व्यास साहित्य एवं शिक्षा-पत्रकारिता

फिल्मफेअर अवॉर्ड्स 2024 विजेत्यांची यादी

 

फिल्मफेअर अवॉर्ड्स 2024 विजेत्यांची यादी

 

सर्वोत्कृष्ट चित्रपट - 12 वीं फेल

सर्वोत्कृष्ट चित्रपट (क्रिटिक्स) - जोरम

सर्वोत्कृष्ट अभिनेता - रणबीर कपूर (अॅनिमल)

सर्वोत्कृष्ट अभिनेत्री - आलिया भट्ट (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)

सर्वोत्कृष्ट अभिनेता (क्रिटिक्स) - विक्रांत मेस्सी (12 वी फेल)

सर्वोत्कृष्ट अभिनेत्री (क्रिटिक्स) - रानी मुखर्जी (मिसेस चॅटर्जी व्हर्सेस नॉर्वे) आणि शेफाली शाह (थ्री ऑफ अस)

सर्वोत्कृष्ट दिग्दर्शक - विधु विनोद चोपडा (12 वी फेल)

सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता - विकी कौशल (डंकी)

सर्वोत्कृष्ट अभिनेत्री - शबाना आझमी (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)

सर्वोत्कृष्ट संवाद - इशिता मोइत्रा (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)

सर्वोत्कृष्ट पटकथा - विधु विनोद चोप्रा (12 वी फेल)

सर्वोत्कृष्ट पदार्पण (अभिनेत्री) - अलीजेह अग्निहोत्री (फर्रे)

सर्वोत्कृष्ट पदार्पण (अभिनेता) - आदित्य रावल (फराज)

सर्वोत्कृष्ट दिग्दर्शक (पदार्पण) - तरुण डुडेजा (धक धक)

जीवनगौरव पुरस्कार - डेविड धवन

सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायक - भूपिंदर बब्बल (अर्जन वैली)

सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायिका - शिल्पा राव (बेशरम रंग)

सर्वोत्कृष्ट वीएफएक्स - जवान

सर्वोत्कृष्ट कथा - अमित राय (ओएमजी 2) आणि देवाशीष मखीजा (जोरम)

सर्वोत्कृष्ट अक्शनपट - जवान

ब्लॉग वरील सर्व पोस्ट वाचा.